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mahabharat 2.40.d84: श्रेष्ठ श्रीहरि के वरदान से उसने अहंकारी, पराक्रमी एवं महापराक्रमी राक्षसराज का बड़े वेग से वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d84
 
 
श्लोक  2.40.d84 
महाबलं महावीर्यं वरदानेन दर्पितम्॥
दैत्यश्रेष्ठं सुरश्रेष्ठो जघान तरसा हरि:।
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ श्रीहरि के वरदान से उसने अहंकारी, पराक्रमी एवं महापराक्रमी राक्षसराज का बड़े वेग से वध कर दिया।
 
With the boon of the best Sri Hari, he killed the arrogant, mighty and mighty demon king with great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)