श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d63-d64
 
 
श्लोक  2.40.d63-d64 
आदित्या मरुत: साध्या विश्वे च वसवस्तथा।
रुद्रा महर्षयश्चैव अश्विनौ च सुरूपिणौ॥
अन्ये च दिव्या ये राजंस्ते सर्वे सगणा: सुरा:।
चतुर्मुखं पुरस्कृत्य श्वेतद्वीपमुपस्थिता:॥
 
 
अनुवाद
आदित्य, मरुद्गण, साध्य, विश्वेदेव, वसु, रुद्र, महर्षि, सुंदर रूप वाले अश्विनी कुमार तथा दिव्य रूप वाले अन्य पुरुष अर्थात सभी देवता अपने गणों सहित चतुर्मुख ब्रह्माजी को अपने आगे-आगे लेकर श्वेतद्वीप में उपस्थित हुए।
 
Aditya, Marudgana, Sadhya, Vishvedev, Vasu, Rudra, Maharishi, Ashwini Kumar of beautiful form and other men of divine form, that is, all the gods along with their Ganas, present in Shwetdweep, carrying Chaturmukh Brahmaji in front of them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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