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mahabharat 2.40.d56: हे प्रभु! आप समस्त प्राणियों के आदि रचयिता, स्वयंभू, सर्वव्यापी, पवित्र काव्यों के रचयिता, अव्यक्त प्रकृति और शाश्वत स्वरूप हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d56 
भगवन् सर्वभूतानां स्वयम्भूरादिकृद् विभु:।
स्रष्टा त्वं हव्यकव्यानामव्यक्तप्रकृतिर्ध्रुव:॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आप समस्त प्राणियों के आदि रचयिता, स्वयंभू, सर्वव्यापी, पवित्र काव्यों के रचयिता, अव्यक्त प्रकृति और शाश्वत स्वरूप हैं।
 
Lord! You are the original creator of all beings, self-sufficient, omnipresent, creator of sacred poems, unmanifested nature and eternal form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)