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mahabharat 2.40.d52-d53: उस दुष्टात्मा के शासनकाल में पाँच करोड़ इकसठ लाख साठ हज़ार वर्ष बीत गए। इतने वर्षों तक राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने दैवी सुखों और विलासिताओं का आनंद लिया।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d52-d53 
पञ्च कोटॺश्च वर्षाणि नियुतान्येकषष्टि च॥
षष्टिश्चैव सहस्राणां जग्मुस्तस्य दुरात्मन:।
एतद् वर्षं स दैत्येन्द्रो भोगैश्वर्यमवाप स:॥
 
 
अनुवाद
उस दुष्टात्मा के शासनकाल में पाँच करोड़ इकसठ लाख साठ हज़ार वर्ष बीत गए। इतने वर्षों तक राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने दैवी सुखों और विलासिताओं का आनंद लिया।
 
Five crore sixty one lakh sixty thousand years passed during the reign of that evil soul. For so many years, demon king Hiranyakashipu enjoyed divine pleasures and luxuries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)