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mahabharat 2.40.d51: उसने दैत्यों को यज्ञ का अधिकारी बना दिया और देवताओं को उससे वंचित कर दिया। देवता जहाँ भी जाते, वह उनका पीछा करता। देवताओं के सभी स्थानों पर अधिकार करके, वह स्वयं त्रिलोकी पर शासन करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  2.40.d51 
यज्ञीयान् कृतवान् दैत्यानयज्ञीयांश्च देवता:।
यत्र यत्र सुरा जग्मुस्तत्र तत्र व्रजत्युत॥
स्थानानि देवतानां तु हृत्वा राज्यमपालयत्।
 
 
अनुवाद
उसने दैत्यों को यज्ञ का अधिकारी बना दिया और देवताओं को उससे वंचित कर दिया। देवता जहाँ भी जाते, वह उनका पीछा करता। देवताओं के सभी स्थानों पर अधिकार करके, वह स्वयं त्रिलोकी पर शासन करने लगा।
 
He made the demons the authority to perform the yagya and deprived the gods of that right. Wherever the gods went, he followed them. After usurping all the places of the gods, he himself started ruling the kingdom of Triloki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)