Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.40.d41: ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त होते ही राक्षस हिरण्यकशिपु ने समस्त प्रजा को कष्ट देना शुरू कर दिया। वरदान के कारण उसका अभिमान बहुत बढ़ गया था।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d41
 
 
श्लोक  2.40.d41 
लब्धमात्रे वरे चापि सर्वास्ता बाधते प्रजा:।
हिरण्यकशिपुर्दैत्यो वरदानेन दर्पित:॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त होते ही राक्षस हिरण्यकशिपु ने समस्त प्रजा को कष्ट देना शुरू कर दिया। वरदान के कारण उसका अभिमान बहुत बढ़ गया था।
 
As soon as the demon Hiranyakashipu got the boon from Brahmaji, he started tormenting all the people. His pride had increased a lot due to the boon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)