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mahabharat 2.40.d4: महात्मा श्री हरि के अवतार, जिन्हें वराह कहा जाता है, में वैदिक श्रुति ही मुख्य प्रमाण है। उस अवतार में भगवान ने वराह रूप धारण करके पर्वतों और वनों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को जल से बाहर निकाला था।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d4 
वाराहस्तु श्रुतिमुख: प्रादुर्भावो महात्मन:।
यत्र विष्णु: सुरश्रेष्ठो वाराहं रूपमास्थित:॥
उज्जहार महीं तोयात् सशैलवनकाननाम्।
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री हरि के अवतार, जिन्हें वराह कहा जाता है, में वैदिक श्रुति ही मुख्य प्रमाण है। उस अवतार में भगवान ने वराह रूप धारण करके पर्वतों और वनों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को जल से बाहर निकाला था।
 
In the incarnation of Mahatma Shri Hari, who is called Varaha, the Vedic Shruti is the main proof. During that incarnation, God had taken the form of Varaha and pulled out the entire earth including mountains and forests from the water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)