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mahabharat 2.40.d39: ब्रह्माजी बोले - हे देवताओं! उस दैत्य को उसकी तपस्या का फल अवश्य मिलेगा। जब फल भोगकर उसकी तपस्या समाप्त हो जाएगी, तब स्वयं भगवान विष्णु उसका वध करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d39
 
 
श्लोक  2.40.d39 
ब्रह्मोवाच
अवश्यं त्रिदशास्तेन प्राप्तव्यं तपस: फलम्।
तपसोऽन्तेऽस्य भगवान् वधं कृष्ण: करिष्यति॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - हे देवताओं! उस दैत्य को उसकी तपस्या का फल अवश्य मिलेगा। जब फल भोगकर उसकी तपस्या समाप्त हो जाएगी, तब स्वयं भगवान विष्णु उसका वध करेंगे।
 
Brahmaji said - O Gods! That demon will definitely get the fruits of his penance. When the penance ends by enjoying the fruits, then Lord Vishnu himself will kill him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)