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mahabharat 2.40.d34: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर भगवान ब्रह्मा आकाश मार्ग से चले गए और ब्रह्मलोक में जाकर ब्रह्मऋषियों द्वारा सेवित होकर अत्यंत शोभायमान हो गए।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d34 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स भगवानाकाशेन जगाम ह।
रराज ब्रह्मलोके स ब्रह्मर्षिगणसेवित:॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! ऐसा कहकर भगवान ब्रह्मा आकाश मार्ग से चले गए और ब्रह्मलोक में जाकर ब्रह्मऋषियों द्वारा सेवित होकर अत्यंत शोभायमान हो गए।
 
Bhishmaji says- Yudhishthira! After saying this, Lord Brahma left through the sky and after going to Brahmaloka, he became very beautiful after being served by the Brahmarishis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)