श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d33
 
 
श्लोक  2.40.d33 
ब्रह्मोवाच
एते दिव्या वरास्तात मया दत्तास्तवाद्‍भुता:।
सर्वकामान् वरांस्तात प्राप्स्यसे त्वं न संशय:॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- पिताश्री! मैंने तुम्हें ये दिव्य एवं अद्भुत वरदान दिए हैं। पुत्र! इसमें कोई संदेह नहीं है कि तुम्हें अपनी समस्त कामनाओं सहित ये इच्छित वरदान अवश्य प्राप्त होंगे।
 
Brahmaji said- Father! I have given you these divine and wonderful boons. Son! There is no doubt that you will definitely get these desired boons along with all your wishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)