| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा » श्लोक d30 |
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| | | | श्लोक 2.40.d30  | न शस्त्रेण न चास्त्रेण गिरिणा पादपेन च।
न शुष्केण न चार्द्रेण स्यान्न वान्येन मे वध:॥ | | | | | | अनुवाद | | मैं किसी अस्त्र से, शस्त्र से, पर्वतों से, वृक्षों से, सूखे से, वर्षा से, या किसी अन्य शस्त्र से न मारा जाऊँ। | | | | May I not be killed by any weapon, nor by weapons, nor by mountains, nor by trees, nor by drought, nor by wetness, nor by any other weapon. | |
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