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mahabharat 2.40.d28: हिरण्यकशिपु ने कहा - श्रेष्ठ! देवता, दानव, गंधर्व, यक्ष, सर्प, राक्षस, मनुष्य या पिशाच कोई भी मुझे नहीं मार सकता।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d28 
हिरण्यकशिपुरुवाच
न देवासुरगन्धर्वा न यक्षोरगराक्षसा:।
न मानुषा: पिशाचाश्च हन्युर्मां देवसत्तम॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा - श्रेष्ठ! देवता, दानव, गंधर्व, यक्ष, सर्प, राक्षस, मनुष्य या पिशाच कोई भी मुझे नहीं मार सकता।
 
Hiranyakashipu said – Best! No one, be it gods, demons, Gandharvas, Yakshas, snakes, demons, humans or vampires, can kill me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)