श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d23-d25
 
 
श्लोक  2.40.d23-d25 
आदित्यैर्वसुभि: साध्यै: मरुद्भिर्दैवतै: सह।
रुद्रैर्विश्वसहायैश्च यक्षराक्षसकिन्नरै:॥
दिशाभिर्विदिशाभिश्च नदीभि: सागरैस्तथा।
नक्षत्रैश्च मुहूर्तैश्च खेचरैश्चापरैर्ग्रहै:॥
देवर्षिभिस्तपोयुक्तै: सिद्धै: सप्तर्षिभिस्तथा।
राजर्षिभि: पुण्यतमैर्गन्धर्वैरप्सरोगणै:॥
 
 
अनुवाद
उनके साथ आदित्य, वसु, साध्य, मरुद्गण, देवगण, रुद्रगण, विश्वेदेव, यक्ष, राक्षस, किन्नर, दिशा, विदिशा, नदी, समुद्र, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, अन्य दिव्य ग्रह, तपस्वी देवर्षि, सिद्ध, सप्तर्षि, पुण्यात्मा राजर्षि, गंधर्व और अप्सराएँ भी थे।
 
Along with them were Aditya, Vasu, Sadhya, Marudgana, Devgana, Rudragana, Vishvedev, Yaksha, Rakshasa, Kinnara, Disha, Vidisha, river, sea, constellation, auspicious time, other celestial planets, ascetic Devarshi, Siddha, Saptarshi, virtuous Rajarshi, Gandharva and Apsaras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)