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mahabharat 2.40.d212: श्री राम के शासनकाल में कोई भी व्यक्ति पाप कर्म में लिप्त नहीं था। सभी के प्राण और अपान समभाव में थे।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d212 
नाधर्मिष्ठो नर: कश्चिद् बभूव प्राणिनां क्वचित्।
प्राणापानौ समावास्तां रामे राज्यं प्रशासति॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के शासनकाल में कोई भी व्यक्ति पाप कर्म में लिप्त नहीं था। सभी के प्राण और अपान समभाव में थे।
 
During the reign of Shri Ram, no person used to indulge in sinful activities. Everyone's prana and apana were in equanimity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)