Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.40.d21: हे निष्पाप राजा! उसके द्वारा इन्द्रिय संयम, मनःसंयम, ब्रह्मचर्य, तप और शौच-संतुष्टि आदि नियमों का पालन करने से ब्रह्माजी को बहुत प्रसन्नता हुई। | mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो दमशमाभ्यां च ब्रह्मचर्येण चानघ।
ब्रह्मा प्रीतमनास्तस्य तपसा नियमेन च॥
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! उसके द्वारा इन्द्रिय संयम, मनःसंयम, ब्रह्मचर्य, तप और शौच-संतुष्टि आदि नियमों का पालन करने से ब्रह्माजी को बहुत प्रसन्नता हुई।
Sinless king! Brahmaji felt very happy due to his following the rules like restraint of senses, mental control, celibacy, penance and toilet-satisfaction etc.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥