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श्लोक  2.40.d209-d210 
ऋषीणां देवतानां च मनुष्याणां तथैव च।
पृथिव्यां सहवासोऽभूद् रामे राज्यं प्रशासति॥
सर्वे ह्यासंस्तृप्तरूपास्तदा तस्मिन् विशाम्पते।
धर्मेण पृथिवीं सर्वामनुशासति भूमिपे॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी के राज्यकाल में इस पृथ्वी पर ऋषि, देवता और मनुष्य सभी एक साथ रहते थे। महाराज! जिन दिनों भूमिपाल श्री रघुनाथजी सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज्य करते थे, उन दिनों उनके राज्य में सभी लोग पूर्णतः संतुष्ट रहते थे।
 
During the reign of Shri Ramchandraji, sages, gods and humans lived together on this earth. King! During the days when Bhumipal Shri Raghunathji ruled the entire earth, everyone in his kingdom felt completely satisfied.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)