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श्लोक  2.40.d205 
सर्वमासीत् तदा तृप्तं रामे राज्यं प्रशासति।
न संकरकरा वर्णा नाकृष्टकरकृज्जन:॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचंद्रजी के शासनकाल में सारा संसार संतुष्ट था। किसी भी जाति का व्यक्ति वर्ण-जाति की संतान उत्पन्न नहीं करता था। कोई भी व्यक्ति उस भूमि पर कर नहीं देता था जो जुताई-बुआई के काम न आती थी।
 
During the reign of Shri Ramchandraji, the entire world was satisfied. People of any caste did not produce mixed-caste children. No person paid tax for land that was not used for ploughing and sowing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)