Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.40.d205: श्री रामचंद्रजी के शासनकाल में सारा संसार संतुष्ट था। किसी भी जाति का व्यक्ति वर्ण-जाति की संतान उत्पन्न नहीं करता था। कोई भी व्यक्ति उस भूमि पर कर नहीं देता था जो जुताई-बुआई के काम न आती थी। | mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वमासीत् तदा तृप्तं रामे राज्यं प्रशासति।
न संकरकरा वर्णा नाकृष्टकरकृज्जन:॥
अनुवाद
श्री रामचंद्रजी के शासनकाल में सारा संसार संतुष्ट था। किसी भी जाति का व्यक्ति वर्ण-जाति की संतान उत्पन्न नहीं करता था। कोई भी व्यक्ति उस भूमि पर कर नहीं देता था जो जुताई-बुआई के काम न आती थी।
During the reign of Shri Ramchandraji, the entire world was satisfied. People of any caste did not produce mixed-caste children. No person paid tax for land that was not used for ploughing and sowing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥