Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.40.d20: साढ़े ग्यारह हजार वर्षों तक पूर्वोक्त तप के निमित्त मन्त्र जप और उपवास में लगे रहकर वे काठ के ठूँठ के समान अविचल हो गये और दृढ़तापूर्वक मौनव्रत का पालन करने लगे। | mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दशवर्षसहस्राणि शतानि दश पञ्च च।
जपोपवासैस्तस्यासीत् स्थाणुर्मौनव्रतो दृढ:॥
अनुवाद
साढ़े ग्यारह हजार वर्षों तक पूर्वोक्त तप के निमित्त मन्त्र जप और उपवास में लगे रहकर वे काठ के ठूँठ के समान अविचल हो गये और दृढ़तापूर्वक मौनव्रत का पालन करने लगे।
By engaging in the chanting of mantras and fasting for the purpose of the aforesaid penance for eleven and a half thousand years, he became as unshakeable as a stump of wood and firmly observed the vow of silence.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥