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mahabharat 2.40.d195: वहाँ देवताओं, नागों, यक्षों, राक्षसों और पक्षियों के लिए अजेय तथा युद्ध में अपराजित राक्षसराज रावण करोड़ों राक्षसों के साथ रहता था। वह किसी खदान से निकले हुए कोयले के ढेर के समान दिखाई देता था।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d195
 
 
श्लोक  2.40.d195 
देवोरगगणानां हि यक्षराक्षसपक्षिणाम्।
तत्रावध्यं राक्षसेन्द्रं रावणं युधि दुर्जयम्॥
युक्तं राक्षसकोटीभिर्भिन्नाञ्जनचयोपमम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ देवताओं, नागों, यक्षों, राक्षसों और पक्षियों के लिए अजेय तथा युद्ध में अपराजित राक्षसराज रावण करोड़ों राक्षसों के साथ रहता था। वह किसी खदान से निकले हुए कोयले के ढेर के समान दिखाई देता था।
 
There, the demon king Ravana, who was invincible for the gods, serpents, yakshas, demons and birds and who was undefeated in war, lived with millions of demons. He looked like a heap of coal dug out from a mine.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)