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mahabharat 2.40.d19: महाबली हिरण्यकशिपु धैर्यवान और बलवान था। वह दैत्य वंश का पूर्वज था। राजन! उसने वन में जाकर घोर तपस्या की।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d19 
दैत्यानामादिपुरुषो वीर्यवान् धृतिमान् बली।
प्रविश्य स वनं राजंश्चकार तप उत्तमम्॥
 
 
अनुवाद
महाबली हिरण्यकशिपु धैर्यवान और बलवान था। वह दैत्य वंश का पूर्वज था। राजन! उसने वन में जाकर घोर तपस्या की।
 
The mighty Hiranyakashipu was patient and strong. He was the ancestor of Daitya clan. Rajan! He went to the forest and did great penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)