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mahabharat 2.40.d18: राजन! प्राचीन काल में देवताओं का शत्रु हिरण्यकशिपु समस्त दैत्यों का राजा था। वह न केवल बलवान था, बल्कि उसे अपने पर बहुत अभिमान भी था। वह तीनों लोकों के लिए काँटे के समान हो गया था।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d18 
दैत्येन्द्रो बलवान् राजन् सुरारिर्बलगर्वित:।
हिरण्यकशिपुर्नाम आसीत् त्रैलोक्यकण्टक:॥
 
 
अनुवाद
राजन! प्राचीन काल में देवताओं का शत्रु हिरण्यकशिपु समस्त दैत्यों का राजा था। वह न केवल बलवान था, बल्कि उसे अपने पर बहुत अभिमान भी था। वह तीनों लोकों के लिए काँटे के समान हो गया था।
 
Rajan! In ancient times, Hiranyakashipu, the enemy of the gods, was the king of all the demons. Not only was he strong, he was also very proud of himself. He was becoming like a thorn for all three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)