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mahabharat 2.40.d161: जिस समय ब्राह्मण लोग "भृगु नंदन परशुराम! दौड़ो, मुझे बचाओ" आदि कहकर रो रहे थे, उस समय परशुराम जी उन पीड़ित लोगों का करुण क्रंदन सहन न कर सके।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d161 
न ह्यमृष्यत तां वाचमार्तैर्भृशमुदीरिताम्।
भृगो रामाभिधावेति यदाक्रन्दन् द्विजातय:॥
 
 
अनुवाद
जिस समय ब्राह्मण लोग "भृगु नंदन परशुराम! दौड़ो, मुझे बचाओ" आदि कहकर रो रहे थे, उस समय परशुराम जी उन पीड़ित लोगों का करुण क्रंदन सहन न कर सके।
 
At the time when the Brahmins were crying saying, "Bhrigu Nandan Parshuram! Run, save me" etc., Parshuram ji could not bear the wailing cries of those suffering people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)