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mahabharat 2.40.d151-d152: महाराज युधिष्ठिर! महर्षि जमदग्नि के पुत्र परशुराम बड़े वीर थे। बलवानों में श्रेष्ठ परशुराम ने हैहय वंश का नाश कर दिया था। महाबली कार्तवीर्य अर्जुन बल में उनके समान कोई नहीं था; किन्तु अपने अनुचित आचरण के कारण जमदग्निपुत्र परशुराम के हाथों मारे गए।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d151-d152
 
 
श्लोक  2.40.d151-d152 
जगदग्निसुतो राजन् रामो नाम स वीर्यवान्।
हैहयान्तकरो राजन् स रामो बलिनां वर:॥
कार्तवीर्यो महावीर्यो बलेनाप्रतिमस्तथा।
रामेण जामदग्न्येन हतो विषममाचरन्॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! महर्षि जमदग्नि के पुत्र परशुराम बड़े वीर थे। बलवानों में श्रेष्ठ परशुराम ने हैहय वंश का नाश कर दिया था। महाबली कार्तवीर्य अर्जुन बल में उनके समान कोई नहीं था; किन्तु अपने अनुचित आचरण के कारण जमदग्निपुत्र परशुराम के हाथों मारे गए।
 
Maharaj Yudhishthira! Maharishi Jamadagni's son Parashurama was very brave. Parashurama, the best among the strong, had destroyed the Haihaya dynasty. The mighty Kartavirya Arjuna had no equal in strength; but due to his inappropriate behavior, he was killed by Jamadagni's son Parashurama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)