vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा
»
श्लोक d145
श्लोक
2.40.d145
स स्मारण्ये मनुष्याणां राजा क्षेत्राणि रक्षति।
इदं तु कार्तवीर्यस्य बभूवासदृशं जनै:॥
अनुवाद
वह वनों में मनुष्यों के खेतों की रक्षा करता था। यह कार्तवीर्य का अद्भुत कार्य है, जिसकी तुलना मनुष्यों से नहीं की जा सकती।
He used to protect the fields of humans in the forests. This is the amazing work of Kartavirya, which cannot be compared to humans.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×