श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  2.40.d14 
शृङ्गेणेमां समुद्‍धृत्य लोकानां हितकाम्यया॥
सहस्रशीर्षो देवो हि निर्ममे जगतीं प्रभु:।
 
 
अनुवाद
हजारों सिरों से सुशोभित उस प्रभु ने अपने सींगों (या दाढ़ों) की सहायता से इस पृथ्वी को सम्पूर्ण जगत के हित के लिए मुक्त किया तथा इसे जगत के लिए सुदृढ़ आश्रय बनाया।
 
That Lord, adorned with thousands of heads, redeemed this earth for the benefit of the whole world with the help of his horns (or molars) and made it a strong shelter for the world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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