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mahabharat 2.40.d121: महाराज! अब मैं पुनः भगवान विष्णु के दत्तात्रेय नामक अवतार का वर्णन करता हूँ। दत्तात्रेयजी एक बहुत प्रसिद्ध महर्षि थे।   |   mahabharat अध्याय 2.40: वराह, नृसिंह, वामन, दत्तात्रेय, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण तथा कल्कि अवतारोंकी संक्षिप्त कथा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.40.d121 
विष्णो: पुनर्महाराज प्रादुर्भावो महात्मन:।
दत्तात्रेय इति ख्यात ऋषिरासीन्महायशा:॥
 
 
अनुवाद
महाराज! अब मैं पुनः भगवान विष्णु के दत्तात्रेय नामक अवतार का वर्णन करता हूँ। दत्तात्रेयजी एक बहुत प्रसिद्ध महर्षि थे।
 
Maharaj! Now I again describe the incarnation of Lord Vishnu named Dattatreya. Dattatreyaji was a very famous Maharishi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)