श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  2.4.d6 
बहुवर्णं हि लक्ष्येत ध्वजं वानरलक्षणम्।
ध्वजोत्कटं ह्यनवमं युद्धे द्रक्ष्यसि विष्ठितम्॥
 
 
अनुवाद
आपका ध्वज, जिस पर बंदर का प्रतीक है, अनेक रंगों का प्रतीत होता है। इस मजबूत और स्थिर ध्वज को आप युद्ध में कभी झुकते हुए नहीं देखेंगे।
 
Your flag with the monkey symbol on it appears to be of many colours. You will never see this strong and stable flag bending in battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)