श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.4.d1 
(वैशम्पायन उवाच
तां तु कृत्वा सभां श्रेष्ठां मयश्चार्जुनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उस महान् सभाभवन का निर्माण करके मयासुर ने अर्जुन से कहा।
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! After building that great assembly hall, Mayasur said to Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)