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mahabharat 2.4.5: तत्पश्चात् उन्होंने प्रत्येक ब्राह्मण को एक-एक हजार गौएँ दीं। उस समय ब्राह्मणों के यज्ञोपवीत का पवित्र उच्चारण स्वर्ग तक गूँज रहा था। 5॥   |   mahabharat अध्याय 2.4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.4.5 
ददौ तेभ्य: सहस्राणि गवां प्रत्येकश: पुन:।
पुण्याहघोषस्तत्रासीद् दिवस्पृगिव भारत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने प्रत्येक ब्राह्मण को एक-एक हजार गौएँ दीं। उस समय ब्राह्मणों के यज्ञोपवीत का पवित्र उच्चारण स्वर्ग तक गूँज रहा था। 5॥
 
India After that he gave one thousand cows to every Brahmin. At that time, the solemn recitation of the sacred thread of the Brahmins seemed to echo up to heaven. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)