Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.4.40: जिस प्रकार देवतागण दिव्य लोक की सभा में ब्रह्माजी की पूजा करते हैं, उसी प्रकार अनेक महापुरुष अपने वचनों पर अडिग और उत्तम व्रतों का पालन करते हुए उस सभा में बैठकर राजा युधिष्ठिर की पूजा करते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.4.40 
तस्यां सभायामासीना: सुव्रता: सत्यसंगरा:।
दिवीव देवा ब्रह्माणं युधिष्ठिरमुपासते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार देवतागण दिव्य लोक की सभा में ब्रह्माजी की पूजा करते हैं, उसी प्रकार अनेक महापुरुष अपने वचनों पर अडिग और उत्तम व्रतों का पालन करते हुए उस सभा में बैठकर राजा युधिष्ठिर की पूजा करते थे।
 
Just as the gods worship Lord Brahma in the assembly of the divine world, similarly, many great men, true to their word and observing excellent vows, sat in that assembly and worshiped King Yudhishthira.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि सभाक्रियापर्वणि सभाप्रवेशो नाम चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत सभाक्रियापर्वमें सभाप्रवेश नामक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४५ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)