श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  2.4.33-34 
अर्जुनं ये च संश्रित्य राजपुत्रा महाबला:॥ ३३॥
अशिक्षन्त धनुर्वेदं रौरवाजिनवासस:।
तत्रैव शिक्षिता राजन् कुमारा वृष्णिनन्दना:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जो महाबली राजकुमार अर्जुन के पास रहकर काले मृगचर्म धारण करके धनुर्वेद की शिक्षा लेते थे (वे उस सभाभवन में बैठकर राजा युधिष्ठिर की भी पूजा करते थे) राजन! वृष्णिवंश को आनन्द प्रदान करने वाले राजकुमार वहाँ शिक्षा पाते थे ॥33-34॥
 
Those who used to live near the mighty prince Arjun and learn Dhanurveda wearing black deer skin (they also used to worship King Yudhishthira while sitting in that assembly hall). Rajan! The princes who brought joy to the Vrishni dynasty were educated there. 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)