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mahabharat 2.4.1-3: वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने दस हजार ब्राह्मणों को मधु और घी से मिश्रित खीर, खिचड़ी, जीवन्ती की सब्जी, सब प्रकार के नैवेद्य, नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ और फल, गन्ना आदि चबेना और बहुत से पेय (शर्बत) खिलाकर सभाभवन में प्रवेश किया।   |   mahabharat अध्याय 2.4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 4: मयद्वारा निर्मित सभाभवनमें धर्मराज युधिष्ठिरका प्रवेश तथा सभामें स्थित महर्षियों और राजाओं आदिका वर्णन  »  श्लोक 1-3
 
 
श्लोक  2.4.1-3 
वैशम्पायन उवाच
तत: प्रवेशनं तस्यां चक्रे राजा युधिष्ठिर:।
अयुतं भोजयित्वा तु ब्राह्मणानां नराधिप:॥ १॥
साज्येन पायसेनैव मधुना मिश्रितेन च।
कृसरेणाथ जीवन्त्या हविष्येण च सर्वश:॥ २॥
भक्ष्यप्रकारैर्विविधै: फलैश्चापि तथा नृप।
चोष्यैश्च विविधै राजन् पेयैश्च बहुविस्तरै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने दस हजार ब्राह्मणों को मधु और घी से मिश्रित खीर, खिचड़ी, जीवन्ती की सब्जी, सब प्रकार के नैवेद्य, नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ और फल, गन्ना आदि चबेना और बहुत से पेय (शर्बत) खिलाकर सभाभवन में प्रवेश किया।
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya! Thereafter King Yudhishthira entered the assembly hall after feeding ten thousand Brahmins with kheer (rice pudding) mixed with honey and ghee, khichri, vegetables of Jeevantika, all kinds of offerings, various types of eatables and fruits, sugarcane and other kinds of chewing gum and lots of drinks (sherbet).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)