Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.39.d6-d7: धर्मराज के पास बैठे हुए सभी राजा उनकी बातें सुन रहे थे। हे राजन! बुद्धिमानों में श्रेष्ठ भीमकर्मा भीष्म शत्रु-संहारक चेदिराज शिशुपाल को सान्त्वनापूर्ण शब्दों में समझाकर पुनः कुरुराज युधिष्ठिर से इस प्रकार कहने लगे। | mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शृण्वतां पार्थिवानां च धर्मराजस्य चान्तिके।
इदं मतिमतां श्रेष्ठ: कृष्णं प्रति विशाम्पते॥
साम्नैवामन्त्र्य राजेन्द्र चेदिराजमरिंदमम्।
भीमकर्मा ततो भीष्मो भूय: स इदमब्रवीत्॥
कुरूणां चापि राजानं युधिष्ठिरमुवाच ह।
अनुवाद
धर्मराज के पास बैठे हुए सभी राजा उनकी बातें सुन रहे थे। हे राजन! बुद्धिमानों में श्रेष्ठ भीमकर्मा भीष्म शत्रु-संहारक चेदिराज शिशुपाल को सान्त्वनापूर्ण शब्दों में समझाकर पुनः कुरुराज युधिष्ठिर से इस प्रकार कहने लगे।
All the kings sitting near Dharmaraj were listening to his talk. O King! The best of the wise, Bhimkarma Bhishma, after explaining to the enemy-destroyer Chediraj Shishupal in consoling words, started speaking to the Kuru King Yudhishthir again in this manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥