Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.39.d43-d44: वे भगवान पद्मनाभ (विष्णु) की नाभि से प्रकट हुए कमल में विराजमान हो गए। वह कमल वहाँ पहले से ही स्वतः प्रकट था। उसे कमल तो कहा जाता था, पर वह कीचड़ से उत्पन्न नहीं हुआ था। जगतपिता ब्रह्मा ने उस कमल को अपने निवास के लिए चुना और उसकी बहुत स्तुति की। | mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे भगवान पद्मनाभ (विष्णु) की नाभि से प्रकट हुए कमल में विराजमान हो गए। वह कमल वहाँ पहले से ही स्वतः प्रकट था। उसे कमल तो कहा जाता था, पर वह कीचड़ से उत्पन्न नहीं हुआ था। जगतपिता ब्रह्मा ने उस कमल को अपने निवास के लिए चुना और उसकी बहुत स्तुति की।
He sat in the lotus that appeared from the navel of Lord Padmanabh (Vishnu). That lotus had already appeared there on its own. It was called a lotus, but it was not born from mud. Brahma, the father of the world, chose that lotus for his residence and praised it immensely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥