Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.39.d34-d35: प्राचीन काल की कथा है, प्रलयकाल में सभी जीव-जंतु, देवता, दानव, मनुष्य, नाग और राक्षस नष्ट हो गए थे। उस समय एकार्णव (सागर) के जल में दो अत्यंत भयंकर राक्षस रहते थे, जिनके नाम मधु और कैटभ थे। दोनों भाई युद्ध करना चाहते थे। उसी भगवान नारायण ने उन दोनों राक्षसों को मनोवांछित वरदान देकर उनका वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d34-d35
 
 
श्लोक  2.39.d34-d35 
येन चार्णवमध्यस्थौ नष्टे स्थावरजङ्गमे।
नष्टदेवासुरनरे प्रणष्टोरगराक्षसे॥
योद्धुकामौ सुदुर्धर्षौ भ्रातरौ मधुकैटभौ।
हतौ भगवता तेन तयोर्दत्त्वा वृतं वरम्॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल की कथा है, प्रलयकाल में सभी जीव-जंतु, देवता, दानव, मनुष्य, नाग और राक्षस नष्ट हो गए थे। उस समय एकार्णव (सागर) के जल में दो अत्यंत भयंकर राक्षस रहते थे, जिनके नाम मधु और कैटभ थे। दोनों भाई युद्ध करना चाहते थे। उसी भगवान नारायण ने उन दोनों राक्षसों को मनोवांछित वरदान देकर उनका वध कर दिया।
 
It is a story of the past, during the time of deluge, all living beings, gods, demons, humans, serpents and monsters were destroyed. At that time, two very fierce demons lived in the water of Ekarnava (ocean), whose names were Madhu and Kaitabha. Both the brothers wanted to fight. The same Lord Narayana killed those two demons by giving them the desired boons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)