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mahabharat 2.39.d33: इसी प्रकार भगवान श्रीहरि सनत्कुमार, मनु तथा प्रजापति को भी उत्पन्न करते हैं। प्राचीन काल में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी नारायणदेव ने देवताओं आदि की रचना की थी।   |   mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d33
 
 
श्लोक  2.39.d33 
सनत्कुमारं भगवान् मनुं चैव प्रजापतिम्।
पुरा चक्रेऽथ देवादीन् प्रदीप्ताग्निसमप्रभ:॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार भगवान श्रीहरि सनत्कुमार, मनु तथा प्रजापति को भी उत्पन्न करते हैं। प्राचीन काल में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी नारायणदेव ने देवताओं आदि की रचना की थी।
 
Similarly, Lord Shri Hari also creates Sanatkumar, Manu and Prajapati. In ancient times, Narayandev, who was as bright as the burning fire, created the gods etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)