सुप्त्वा युगसहस्रं स प्रादुर्भवति कार्यवान्।
पूर्णे युगसहस्रेऽथ देवदेवो जगत्पति:॥
ब्रह्माणं कपिलं चैव परमेष्ठिनमेव च।
देवान् सप्त ऋषींश्चैव शङ्करं च महायशा:॥
अनुवाद
देवाधिदेव जगदीश्वर महान एवं महिमावान भगवान श्रीहरि हजारों युगों तक शयन करने के पश्चात् कल्पान्त के सहस्रयुग काल की समाप्ति पर प्रकट होकर सृष्टि-रचना के कार्य में संलग्न होते हैं तथा परब्रह्म ब्रह्मा, कपिल, देवगण, सप्तऋषियों तथा शंकर को जन्म देते हैं।
Devadhidev Jagdishwar, the great and glorious Lord Shri Hari, after sleeping for thousands of ages, appears on the completion of the Sahasrayuga period of Kalpanta and engages in the work of creation and gives birth to Supreme Lord Brahma, Kapil, Devganas, Saptarishis and Shankar.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)