vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध
»
श्लोक d26
श्लोक
2.39.d26
सृष्ट्वा चतुर्मुखं देवं देवो नारायण: प्रभु:।
स लोकानां हितार्थाय क्षीरोदे वसति प्रभु:॥
अनुवाद
देवाधिदेव भगवान नारायण सम्पूर्ण जगत के कल्याण के लिए चतुर्मुख भगवान ब्रह्मा की रचना करते हैं तथा क्षीरसागर में निवास करते हैं।
Devadhidev Lord Narayana creates four-faced Lord Brahma and resides in Kshirsagar for the benefit of the entire world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×