vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध
»
श्लोक d25
श्लोक
2.39.d25
मन्वन्तरयुगेऽजस्रं सकल्पा भूतसम्प्लवा।
चक्रवत् परिवर्तन्ते सर्वं विष्णुमयं जगत्॥
अनुवाद
मन्वन्तर, युग, कल्प और प्रलय - ये चक्र की भाँति निरन्तर घूमते रहते हैं। यह सम्पूर्ण जगत विष्णु से परिपूर्ण है।
Manvantara, Yuga, Kalpa and Pralay – they continuously rotate like a wheel. This entire world is full of Vishnu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×