Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.39.d25: मन्वन्तर, युग, कल्प और प्रलय - ये चक्र की भाँति निरन्तर घूमते रहते हैं। यह सम्पूर्ण जगत विष्णु से परिपूर्ण है।   |   mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  2.39.d25 
मन्वन्तरयुगेऽजस्रं सकल्पा भूतसम्प्लवा।
चक्रवत् परिवर्तन्ते सर्वं विष्णुमयं जगत्॥
 
 
अनुवाद
मन्वन्तर, युग, कल्प और प्रलय - ये चक्र की भाँति निरन्तर घूमते रहते हैं। यह सम्पूर्ण जगत विष्णु से परिपूर्ण है।
 
Manvantara, Yuga, Kalpa and Pralay – they continuously rotate like a wheel. This entire world is full of Vishnu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)