vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध
»
श्लोक d24
श्लोक
2.39.d24
कल्पानां बहुकोटॺश्च समतीता हि भारत।
आभूतसम्प्लवाश्चैव बहुकोटॺोऽतिचक्रमु:॥
अनुवाद
भरतनन्दन! अब तक करोड़ों कल्प बीत चुके हैं और करोड़ों प्रलय भी बीत चुके हैं।
Bharatanandan! Till now, crores of kalpas have passed and crores of pralayas have also passed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×