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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  2.39.d19 
अन्यानि सर्वदैवानि तस्याङ्गानि महात्मन:।
सर्वं व्याप्य हरिस्तस्थौ सूत्रं मणिगणानिव॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार अन्य सभी देवता भी उस महान आत्मा के ही भिन्न-भिन्न अंश हैं। जिस प्रकार एक ही धागा माला के सभी मनकों में व्याप्त होता है, उसी प्रकार भगवान श्रीहरि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं।
 
Similarly, all other gods are also different parts of that great soul. Just like a single thread pervades all the beads of a rosary, in the same way Lord Shri Hari pervades the entire universe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)