vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध
»
श्लोक d17
श्लोक
2.39.d17
नारायणस्य चाङ्गानि सर्वदैवानि भारत।
शिरस्तस्य दिवं राजन् नाभि: खं चरणौ मही॥
अनुवाद
भरतनंदन! भगवान नारायण के सभी अंग सर्वत्र व्याप्त हैं। राजन! आकाश उनका सिर है, आकाश उनकी नाभि है और पृथ्वी उनके चरण हैं।
Bharatnandan! All the parts of Lord Narayana are omnipresent. Rajan! The sky is his head, the sky is his navel and the earth is his feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×