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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  2.39.d16 
आभूतसम्प्लवे प्राप्ते प्रलीने प्रकृतौ महान्।
एकस्तिष्ठति सर्वात्मा स तु नारायण: प्रभु:॥
 
 
अनुवाद
और समस्त भूतों का प्रवाह प्रकृति में विलीन हो जाता है, उस समय केवल परमात्मा भगवान महानारायण ही शेष रहते हैं।
 
And the flow of all the ghosts merges into nature, at that time only the Supreme Soul Lord Mahanarayan remains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)