Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.39.d14: ब्रह्माजी के चार मुख हैं। उन्होंने ही समस्त लोकों की रचना की है। इसी प्रकार प्राचीन काल में समस्त जगत् का निर्माण हुआ।   |   mahabharat अध्याय 2.39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् नारायणकी महिमा और उनके द्वारा मधु-कैटभका वध  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  2.39.d14 
ब्रह्मा चतुर्मुखो लोकान् सर्वांस्तानसृजत् स्वयम्।
आदिकाले पुरा ह्येवं सर्वलोकस्य चोद्भव:॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के चार मुख हैं। उन्होंने ही समस्त लोकों की रचना की है। इसी प्रकार प्राचीन काल में समस्त जगत् का निर्माण हुआ।
 
Brahmaji has four faces. He himself has created all the worlds. In this way the entire world came into existence in the ancient times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)