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mahabharat 2.38.7: योद्धाओं में श्रेष्ठ क्षत्रिय, जो युद्ध में किसी योद्धा को परास्त करके उसे अपने अधीन कर लेता है, वह पराजित क्षत्रिय के लिए गुरु के समान पूजनीय हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 2.38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.38.7 
क्षत्रिय: क्षत्रियं जित्वा रणे रणकृतां वर:।
यो मुञ्चति वशे कृत्वा गुरुर्भवति तस्य स:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
योद्धाओं में श्रेष्ठ क्षत्रिय, जो युद्ध में किसी योद्धा को परास्त करके उसे अपने अधीन कर लेता है, वह पराजित क्षत्रिय के लिए गुरु के समान पूजनीय हो जाता है।
 
The best of warriors, a Kshatriya who defeats a warrior in a war and lets him under his control, becomes as venerable as a Guru to the defeated Kshatriya. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)