श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.38.24 
एष प्रकृतिरव्यक्ता कर्ता चैव सनातन:।
परश्च सर्वभूतेभ्यस्तस्मात् पूज्यतमोऽच्युत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वे अव्यक्त प्रकृति, सनातन कर्ता और समस्त प्राणियों से परे हैं; इसलिए भगवान अच्युत परम पूजनीय हैं ॥24॥
 
He is the unmanifested nature, the eternal doer and beyond all beings; hence Lord Achyuta is the most worship-worthy. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)