Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.38.21: हमने उन भगवान् श्रीकृष्ण की पूजा की है, जो पूर्णतः अर्घ्य ग्रहण करने के योग्य और पूजनीय हैं, जो श्रेष्ठ हैं, पिता हैं और गुरु हैं, तथा सभी गुणों से युक्त हैं, अतः इसके लिए सभी राजा हमें क्षमा करें॥21॥ | mahabharat अध्याय 2.38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमिमं गुणसम्पन्नमार्यं च पितरं गुरुम्।
अर्घ्यमर्चितमर्चार्हं सर्वे संक्षन्तुमर्हथ॥ २१॥
अनुवाद
हमने उन भगवान् श्रीकृष्ण की पूजा की है, जो पूर्णतः अर्घ्य ग्रहण करने के योग्य और पूजनीय हैं, जो श्रेष्ठ हैं, पिता हैं और गुरु हैं, तथा सभी गुणों से युक्त हैं, अतः इसके लिए सभी राजा हमें क्षमा करें॥21॥
We have worshiped Lord Shri Krishna, who is fully worthy and worshipable of receiving Arghya, the best, father and Guru with all the qualities, hence all the kings should forgive us for this. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥