श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.38.17 
गुणैर्वृद्धानतिक्रम्य हरिरर्च्यतमो मत:।
ज्ञानवृद्धो द्विजातीनां क्षत्रियाणां बलाधिक:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण के गुणों को ध्यान में रखते हुए ही हमने वृद्धों की उपेक्षा करके उन्हें ही सबसे अधिक पूज्य माना है। ब्राह्मणों में वही पूज्य माना गया है, जो ज्ञान में सबसे बड़ा है और क्षत्रियों में वही पूज्य है, जो बल में सबसे बड़ा है॥17॥
 
Keeping in mind the qualities of Shri Krishna, we have considered him the most worship-worthy, ignoring the aged men. Among the Brahmins, only he is considered worship-worthy, who is the greatest in knowledge and among the Kshatriyas, only he is worthy of worship, who is the greatest in strength.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)