श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  2.38.14-15 
न केवलं वयं कामाच्चेदिराज जनार्दनम्॥ १४॥
न सम्बन्धं पुरस्कृत्य कृतार्थं वा कथंचन।
अर्चामहेऽर्चितं सद्भिर्भुवि भूतसुखावहम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे चेदिराज! हम श्रीकृष्ण की पूजा किसी कामना से, उन्हें अपना संबंधी मानकर या इस दृष्टि से नहीं कर रहे हैं कि उन्होंने हम पर कोई उपकार किया है। हमारा तो यह मत है कि वे इस जगत के समस्त प्राणियों को सुख पहुँचाते हैं और बड़े-बड़े ऋषियों ने उनकी पूजा की है।॥14-15॥
 
O King of Chedi! We are not worshipping Shri Krishna with any desire, considering him our relative or with the view that he has done us some favour. Our view is that he brings happiness to all the creatures of this world and great saints have worshipped him.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)