श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 38: युधिष्ठिरका शिशुपालको समझाना और भीष्मजीका उसके आक्षेपोंका उत्तर देना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  2.38.12-13h 
ज्ञानवृद्धा मया राजन् बहव: पर्युपासिता:।
तेषां कथयतां शौरेरहं गुणवतो गुणान्॥ १२॥
समागतानामश्रौषं बहून् बहुमतान् सताम्।
 
 
अनुवाद
मैंने अनेक बुद्धिमान मुनियों का संग किया है। मेरे धाम में पधारे हुए उन मुनियों के मुख से मैंने अनंत गुणों वाले भगवान श्रीकृष्ण के असंख्य एवं सर्वमान्य गुणों का वर्णन सुना है। 12 1/2॥
 
I have associated with many wise sages. I have heard the description of innumerable and unanimous qualities of Lord Shri Krishna, who has infinite qualities, from the mouth of those saints who have come to my place. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)